स्कूलों और संस्थाओं के लिए दिशानिर्देश

भारतीय इंटरनेशनल स्कूल, सिंगापुर में छात्र

भारतीय इंटरनेशनल स्कूल, सिंगापुर में छात्र

प्रस्तावना

विश्वव्यापी सामाजिक परिवर्तन और उथल-पुथल के समय में, दुनिया भर में अधिक से अधिक लोग विपश्यना ध्यान के अभ्यास से एकाग्रता, मन की शुद्धि और शांति की खोज कर रहे हैं | विपश्यना का अर्थ है "चीजों को वे वास्तव में जैसी हैं वैसी ही देखना” | यह स्व-अवलोकन के माध्यम से मानसिक शुद्धिकरण की एक तर्कसंगत प्रक्रिया है | कई लोग अपने जीवन के उत्तर काल में विपश्यना शिविर में आते हैं, तब उन्हें लगता है कि यह तकनीक उन्हें जल्दी मिल जाती तो अच्छा होता क्योंकि यह एक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण ढंग से जीवन जीने की कला सीखने का बहुत प्रभावी तंत्र है |

इस मानसिक प्रशिक्षण के पहले चरण की शुरुआत करने के लिए आदर्श समय बचपन ही है, क्योंकि आठ साल की उम्र के बच्चे आनापान ध्यान की तकनीक आसानी से सीख सकते हैं | विपश्यना ध्यान के अभ्यास में आनापान पहला कदम है | यह प्राकृतिक, स्वाभाविक सांस, जैसे भी वह आ रही है और जैसे भी जा रही है, उसका निरीक्षण करना है | आनापान एक सरल तकनीक है जो मन की एकाग्रता को विकसित करने में मदद करती है | यह सीखने में आसान, वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक है | सांस का निरीक्षण ध्यान के लिए सर्वोत्तम है क्योंकि सांस हमेशा उपलब्ध है, और यह पूरी तरह से गैर-सांप्रदायिक है | आनापान ध्यान, अन्य सांस के नियंत्रण पर आधारित तकनीकों से बहुत अलग है | आनापान के अभ्यास या प्रस्तुति में कोई संस्कार या अनुष्ठान शामिल नहीं हैं | इसे एक गैर-सांप्रदायिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे यह पूरे विश्वभर के स्कूल में बच्चों को सिखाने के लिए सर्वोत्तम है | यह पद्धति भगवान बुद्ध से जुड़ी है, जिन्होंने २६०० वर्ष पूर्व फिर से इसकी खोज की और इस तकनीक को सिखाया | बुद्ध ने कभी भी एक सांप्रदायिक धर्म नहीं सिखाया; उन्होंने धर्म –एक मुक्ति का रास्ता- सिखाया, जो सार्वभौमिक है | इस कारण से, दुनिया की हर पार्श्वभूमी के, सभी धर्मों के अथवा कोई धर्म न मानने वाले, सभीलोगों को इसका गहरा आकर्षण है |

इंग्लैंड और मलेशिया केन्द्रों में स्कूल के बच्चे इंग्लैंड और मलेशिया केन्द्रों में स्कूल के बच्चे

इंग्लैंड और मलेशिया केन्द्रों में स्कूल के बच्चे

 

उद्देश्य

बच्चों को शांत करने और उनके मन को एकाग्र करने में मदद करने के अलावा, आनापान बच्चों को अपने मन और स्वयं को बेहतर समझने में मदद करता है | जैसे ही वे अपने मन को शांत और एकाग्र करना सीखते हैं, वे अपने आवेगों और कृतियों में प्रभुत्व प्राप्त करते हैं | वे एक आंतरिक शक्ति विकसित करते हैं जो गलत कृतियों के बजाय सही और उचित कारवाई करने में मदद करती है | यह इस तकनीक का एक स्वाभाविक प्रतिफल है | इस कारण से, आनापान उन्हें भय, चिंताओं और बचपन एवं किशोरावस्था के दबाव से निपटने के लिए एक साधन प्रदान करता है | इसकी सादगी के कारण, वे इस तकनीक को, अभ्यास करने और समझने में आसान पाते हैं और वे इसके वैज्ञानिक और सार्वभौमिक स्वरुप का सम्मान करते हैं |

पिछले २० वर्षों में, दुनिया भर के बच्चों के लिए, हजारों आनापान शिविर संचालित किए गए हैं | इन शिविरों ने उन हजारों बच्चों को काफी लाभ दिया है, जिन्होंने इन शिविरों में भाग लिया | उनमें से कई ने अपने दृष्टिकोण, व्यवहार और नज़रिये में सकारात्मक बदलाव का अनुभव किया है | कई बच्चों ने उनकी एकाग्रता में सुधार हुआ पाया है और उनकी याददाश्त भी मजबूत हुई है | और सब से महत्वपूर्ण, इन बच्चों ने एक साधन हासिल किया है जो उनके भावी जीवन में बहुत मूल्यवान है |

जर्मनी में स्विमोलोजी क्लास का पूर्वाभ्यास

बच्चे स्वभाव से ही, सक्रिय और उत्साही होते हैं, सीखने और तलाशने की उत्सुकता के साथ | इसी कारण उन्हें स्वयं का और उनके मन का, सभी छिपे हुए गुणों, अव्यक्त क्षमताओं और सूक्ष्म जटिलताओं के साथ, पता लगाने का अवसर प्रदान करना उचित है | आनापान सीखने के बाद आत्मनिरीक्षण और ध्यान में एक हितकारी रुचि आती है, जो बाद में उनके जीवन का एक पूरी तरह से नया आयाम खोल सकती है |

आनापान के बाल शिविर १९८६ से आयोजित किये जा रहें हैं | ये शिविर विभिन्न आयु के और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक समूहों के बच्चों के लिए आयोजित किए गए हैं | ये विपश्यना ध्यान केंद्रों के साथ ही स्कूलों और अन्य संस्थाओं में, आवासीय और गैर-आवासीय रूप में आयोजित किए गए हैं |

चाहे बच्चों के आनापान शिविर स्कूल में या विपश्यना ध्यान केन्द्र पर आयोजित किये जाएँ, यह अनुरोध किया जाता है कि छात्रों को स्कूल में आनापान ध्यान का अभ्यास जारी रखने और अभ्यास के वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए शिविर समापन के बाद हर दिन थोडा समय दिया जाए |

मलेशिया में माध्यमिक विद्यालय में अभ्यास जारी रखने वाले छात्र
मलेशिया में माध्यमिक विद्यालय में अभ्यास जारी रखने वाले छात्र

 

पात्रता

आठ से अठारह साल की उम्र के छात्र शिविरों में भाग लेने के लिए पात्र हैं | अलग-अलग शिविर दो भिन्न भिन्न आयु वर्गों के लिए आयोजित किये जाने चाहिए, एक ८ से ११ / १२ साल की उम्र के बच्चों के लिए ; और दूसरा १२ / १३ साल से १६ साल की उम्र के लिए, या कुछ मामलों में १८ साल की उम्र तक भी | ये आदर्श समूह हैं लेकिन थोड़ा अलग समूह भी कभी-कभी संभव है | आठ साल से कम आयु वर्ग के छात्रों और अठारह वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को आनापान शिविर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता |

शिविर में बच्चों की अधिकतम अपेक्षित संख्या पचास है | पचास बच्चों से अधिक बच्चों के शिविरों के आयोजन के लिए, अतिरिक्त बाल शिविर शिक्षकों की (बा.शि.शि.) की आवश्यकता हो सकती है |

 

समय सारिणी

कई वर्षों से स्कूलों के लिए विभिन्न कार्यक्रम विकसित किए गए हैं और सफलतापूर्वक लागू भी किए गए हैं | स्कूल के समय के दौरान एक-दिवसीय या दो-दिन के गैर-आवासीय शिविर आयोजित किए जा सकते हैं | नियमित विद्यालय सप्ताह के दौरान शिविरों के आयोजन के अलावा, सप्ताहांत या छुट्टी की अवधि के दौरान भी स्कूल में शिविर आयोजित किया जा सकता है | (नमूना समय सारिणी देखें) आवासीय स्कूलों में, तीन दिवसीय आवासीय शिविर आयोजित किए जा सकते हैं | शिविर की लंबाई और यह शिविर आवासीय या गैर-आवासीय है उसपर समय सारिणी निर्धारित की जाती है | ऐसे समयों को, जब शिविर में भाग लेने वाले छात्र अन्य शिविर में भाग न लेने वाले बच्चों के साथ बातचीत कर सकते हैं, समय सारिणी में बदला जा सकता हैं | ध्यान अवधि, चर्चा या जांच (जब बा.शि.शि. इस अभ्यास को सुदृढ़ करने के लिए बच्चों के छोटे समूहों से बातचीत करता है), व्याख्यानों और कहानियों, दोपहर का भोजन, विश्राम, खेल आदि के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया जाना चाहिए | एक दिवसीय शिविर की कुल अवधि कम से कम छह घंटे है |

आयोजकों और स्कूल के प्रशासक के साथ परामर्श कर के शिविर का आयोजन करने वाले शिक्षक द्वारा समय सारिणी का निर्णय लिया जाएगा |

 

संस्थाओं के लिए ज़रूरतें

स्कूल में आयोजित बाल आनापान शिविर की प्रक्रिया शुरू करने के लिए, प्रशासक या स्कूल के प्रमुख को या तो बाल शिविर के क्षेत्रीय समन्वयक, बाल शिविर शिक्षक या स्थानीय विपश्यना ध्यान केंद्र को एक औपचारिक अनुरोध भेजना चाहिए | .

आदर्श रूप से, अध्यापन कर्मचारियों या प्रशासन के कम से कम एक व्यक्ति को एक दस दिवसीय विपश्यना शिविर पूरा किया होना चाहिए | इससे बच्चों को हर दिन कुछ मिनट के लिए ध्यान के अभ्यास को जारी रखने का एक अवसर प्रदान करने की वचनबद्धता होगी | स्कूल प्रबंधन इस कार्यक्रम को अपनी दैनिक दिनचर्या में अभ्यास के लिए प्रतिदिन दस मिनट देकर कार्यान्वित कर सकते हैं |

शिविर में भाग लेने वाले छात्रों की संख्या को सावधानी से निर्धारित किया जाना चाहिए | एक बहुत बड़े समूह के लिए प्रबंध करना मुश्किल हो सकता है और एक बहुत छोटे समूह के लिए संयोजक और प्रेरणादायक वातावरण बनाने में कठिनाई हो सकती है | आम तौर पर, पच्चीस से पचास छात्रों के शिविर अच्छे तरीके से साकार होते हैं | आधारभूत संरचना, सुविधा और परिस्थितियों के आधार पर, छात्रों की संख्या भिन्न हो सकती है | आदर्श रूप से, भाग लेने वाले वर्गों के सभी छात्रों के लिए शिविर का आयोजन किया जाना चाहिए | कक्षाओं के अध्यापक, साधक हों या गैर-साधक, शिविर में भाग ले सकते हैं या पर्यवेक्षकों के रूप में बैठ सकते हैं | शिविर के बाद, गैर-साधक शिक्षक जिन्होंने बच्चों के साथ भाग लिया, वे छात्रों के साथ अभ्यास करेंगे - उन्हें सिखायेंगे नहीं | इस संदर्भ में उपयोग करने के लिए एक सामूहिक साधना की सीडी उपलब्ध है |

 

संस्थाओं में शिविरों के लिए दिशानिर्देश

 

बेल्जियम में खेलों का संचालन करते हुए स्वयंसेवक
बेल्जियम में खेलों का संचालन करते हुए स्वयंसेवक
प्रार्थना पत्र

(अपनी संस्था में आनापान शिविर लगाने हेतु शाला प्रबंधक एवं संस्था प्रमुखों के लिए)

 

बेल्जियम में ध्यान के लिए सुविधाएँ
बेल्जियम में ध्यान के लिए सुविधाएँ

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शिक्षक

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