बच्चों के लिए आनापान


बच्चों में सकारात्मक गुण पैदा करने का प्रयास शालाओं का एक महान ध्येय है, जिसकी कोई भी आलोचना नहीं करेगा | जब तक मन पर स्वामित्व पाने के लिए एक प्रभावी, गैर-सांप्रदायिक तकनीक उपलब्ध नहीं है, तब तक नैतिक मूल्यों और नैतिक व्यवहार को कट्टरपंथी प्रकार से या सांप्रदायिकता के बिना सिखाया जाना बहुत कठिन है | इसका कारण यह है कि अपने जंगली "बंदर मन" पर स्वामित्व न होने के कारण, लोगों (न सिर्फ बच्चों !) को जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन करना बहुत मुश्किल लगता है | हर कोई इस बात से सहमत होगा कि बच्चों के लिए बुनियादी नैतिक मूल्यों को सीखना महत्वपूर्ण है | एक नैतिक जीवन जीने से अपनी खुशी में वृध्धि तो होती ही है परन्तु दूसरों की खुशी में भी हम योगदान दे सकते है | हर कोई इस बात से भी सहमत होगा कि सभी मानव गतिविधियों में जागरूकता और एकाग्रता के माध्यम से मन पर कुछ मल्कियत हासिल करना आवश्यक है; लेकिन केवल उपदेश देने से कुछ नहीं होगा |


आनापान ध्यान जागरूकता और एकाग्रता बढ़ने के लिए
(मुंबई, भारत)


बच्चों के व्यवहार और संबंधों में काफी सुधार लाने और उनके शैक्षणिक अवसरों को अधिकतम करने के लिए नैतिक मूल्यों, जागरूकता और एकाग्रता के प्रशिक्षण की शुरुआत करना और उसे शिक्षा का एक अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है | चूंकि विभिन्न धर्मों और जातीय समूहों के बच्चे स्कूलों में एक साथ अध्ययन करते हैं, यह महत्वपूर्ण है कि ऐसा प्रशिक्षण गैर-सांप्रदायिक हो | किसी को भी विवादास्पद न लगे - सभी को स्वीकार हो, चाहे उनकी पार्श्वभूमि कोई भी हो | इसे समझने और अभ्यास करने में सरलता और आसानी होनी चाहिए | सबसे महत्वपूर्ण बात, यह प्रभावी हो; शिक्षा वास्तव में ठोस परिणाम दे जो व्यक्तिगत सुधार में मदद करे और सामंजस्यपूर्ण सामाजिक संबंधों को जन्म दे |

बच्चों का शिविर मेलबोर्न ऑस्ट्रेलिया में

आनापान ध्यान एक प्रभावी गैर-सांप्रदायिक तकनीक है | विपश्यना की तकनीक सीखने में पहला कदम है आनापान | जबकि विपश्यना के गंभीर शिविर वयस्कों के लिए हैं, आनापान आसानी से कम उम्र के बच्चे भी सीख सकते हैं | आनापान एक ऐसी तकनीक है जो सरल है, स्वाभाविक श्वसन पर केंद्रित है और इस प्रकार सांप्रदायिक गुटों से दूर है | बच्चे प्रकृति से ही सक्रिय और उत्साही होते हैं और उन में एक उत्सुकता होती है, सीखने की और खोजबीन करने की | इस उम्र में उन्हें अपनी आतंरिक व अव्यक्त क्षमताओं और सूक्ष्म जटिलताओं के साथ खुद को और अपने मन को समझने का अवसर प्रदान करना बहुत जरूरी है | इसी तरह वे अपने सक्रिय मन का निरीक्षण करना सीखते हैं, और समझते हैं कि वर्तमान क्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के तरीके को कैसे विकसित किया जाए |


अब समाज बच्चों को जो प्रदान करता है, वह अधिकतर भौतिकवाद और तुरंत संतुष्टि की तलाश पर आधारित होता है | आनापान, स्वयं के संपर्क में होने का और बचपन और किशोरावस्था के भय और चिंताओं से निपटने का एक बहुत प्रभावी तरीका प्रदान करता है | बच्चे इस चुनौती पर स्वाभाविक रूप से खरे उतरते हैं |


म्यांमार में लडके


आनापान ध्यान शिविर

आनापान ध्यान का लक्ष्य अपने स्वाभाविक श्वसन क्रिया को बस देखना है | स्वाभाविक सांस, जाति और पंथ की परवाह किए बिना, ध्यान के आलंबन के रूप में सभी के लिए स्वीकार्य है | यही एक ऐसा शारीरिक कार्य है जो जागरूक भी है और अचेत भी है; जानबूझकर या अनजाने में भी हो सकता है; यह स्वैच्छिक भी है और अनैच्छिक भी; यह अविरत है और हमारे मन और मानसिक स्थिति से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ भी है | यही कारण है कि बुद्ध ने एक महत्वपूर्ण ध्यान तकनीक के रूप में स्वाभाविक श्वसन के अवलोकन का इस्तेमाल किया |


बच्चों के लिए, विशेष रूप से संचालित शिविर, आनापान तकनीक से मिलने वाले अनेक लाभों को पाने का एक बढ़िया अवसर हैं | ये शिविर शैक्षणिक संस्थाओं के साथ साथ विपश्यना केंद्रों पर भी आयोजित किए जाते हैं | आनापान शिविर एक से तीन दिनों तक चलते हैं | पर्याप्त प्रयोगों के बाद दैनिक समय सारिणी विकसित की गई है | शिविर की रचना विशेष रूप से बच्चों के हितों और क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए की गयी है | ये शिविर बाल शिविर शिक्षकों और विपश्यना के सहायक आचार्यों द्वारा आयोजित किए जाते हैं, जिन्हें बच्चों का नेतृत्व करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है |

शिविर अनिवार्य रूप से मानसिक अभ्यास को बढ़ावा देते हैं, परन्तु इस बात का भी ख़याल रखा जाता है कि ध्यान बच्चों के लिए बोझ न बन जाए | आनापान ध्यान प्रथा का केन्द्र बिन्दु है, स्वाभाविक श्वसन का अवलोकन – सिर्फ वस्तुनिष्ठ रूप से – जिससे जागरूकता, एकाग्रता और प्रशान्ति का विकास हो | शिविर में बच्चों के लिए उपयुक्त गतिविधियां शामिल हैं, जैसे कहानियां, खेल, रचनात्मक गतिविधियां और एक दैनंदिनी लिखना | बच्चों को, जो आठ से सोलह वर्ष की आयु के बीच में हैं, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से सिखाया जाता है | बाल शिविर शिक्षक कार्यक्रम की निगरानी करते हैं, बच्चों को ध्यान और साधना विधि को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं, और इसे अपने दैनिक जीवन के अनुभव के साथ एकीकृत करने में सहायता करते हैं | इन समूहों में बच्चे परस्पर संवादात्मक रूप से सीखते हैं |
प्रश्नोत्तर समय होन्गकोन्ग में


संदेश सरल, स्पष्ट और तर्कसंगत है: एक अच्छा व्यक्ति वह है जो मन, वाणी या शरीर से दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाता; जो दूसरों की मदद करता है; जो अपने मन पर स्वामित्व रखता है और जो मन को शुद्ध करता है | अगर एक हिन्दू इन गुणों को प्राप्त करता है, तो वह एक अच्छा व्यक्ति है | एक मुसलमान इन गुणों को प्राप्त करता है, तो वह एक अच्छा व्यक्ति है | एक ईसाई, एक बौद्ध, एक यहूदी, एक भारतीय, एक अमेरिकी, या एक जापानी व्यक्ति, या किसी भी जातीय समूह का व्यक्ति - जो इन गुणों को प्राप्त करता है एक अच्छा व्यक्ति है | बच्चों को वास्तव में अच्छाई की यह सार्वभौमिक परिभाषा बहुत पसंद आती है |


क्रोध, घृणा, ईर्ष्या, भय, वासना, लालसा आदि विकार हैं जो हमारे मन को अशुद्ध करते हैं, और हम दुखी बन जाते हैं | शिविर पांच नैतिक व्रतों के साथ शुरू होता है | बुद्ध की शिक्षा के पांच बुनियादी नियम बच्चों को अपने स्वयं के लाभ और कल्याण के साथ ही दूसरों के लाभ और कल्याण के परिप्रेक्ष्य में समझाये जाते हैं | ये शील (व्रत) हैं: हत्या नहीं करना, चोरी से विरत रहना, झूठ या कटू वचन नहीं बोलना, शराब, मादक पदार्थ एवं नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करना और अब्रहम्चर्य का पालन करना | बाल शिविर शिक्षक समझाते हैं कि केवल जानने या याद रखने से मदद नहीं मिलेगी - उन्हें आचरण में लाना होगा |


कहानियों और उदाहरणों के माध्यम से, बच्चे सुनते हैं कि आनापान की तकनीक का अभ्यास, कैसे एकाग्रता और जागरूकता के साथ मन को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे उपदेशों का पालन करने के उनके संकल्प को सहारा मिलता है | अभिभावकों, शिक्षकों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान और आभार जैसे मूल्यों और सज्जनों की संगत से होने वाले लाभ पर प्रकाश डाला जाता है | बच्चे इसे स्वीकार करते हैं क्योंकि वे जिस समय ध्यान करते हैं उसी समय स्वयं ही अनुभव करते हैं कि स्वस्थ या हानिकारक कार्यों का उनकी सांस पर और अंत में उनके मन पर कैसे प्रभाव पड़ता है |


बच्चे होन्गकोन्ग विपश्यना केंद्र में

आनापान के लाभ
भारत में और दुनिया भर में आयोजित शिविरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है | हर साल, हजारों बच्चे भारत में बच्चों के शिविरों में भाग लेते हैं और पश्चिमी देशों में भी कई शिविर आयोजित किए जाते हैं | इन शिविरों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है | इसके तत्काल और दीर्घकालिक लाभ स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो कम उम्र में ही बच्चों को एक मजबूत नैतिक नींव के साथ सकारात्मक जीवन जीने में मदद करता है | जो बच्चे घर या स्कूल में ध्यान जारी रखते हैं, उन बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार आता है क्योंकि ध्यान से उनकी एकाग्रता, स्मृति और आत्म-नियंत्रण को बेहतर बनाने में मदद मिलती है |


शिविरों का मूल्यांकन करने से पता चलता है कि अनुशासन, ईमानदारी, सहयोग, सावधानी, स्वच्छता और एकाग्रता जैसे गुणों में वृद्धि होती है; और चिड़चिड़ापन, झगड़े, अपमानजनक भाषा का उपयोग और हीनभावनाएं कम हो जाती हैं | यह मूल्यांकन माता-पिता और शिक्षकों को दी गयी प्रश्नावली के उत्तरों का अध्ययन करने के बाद किया गया था | यह स्पष्ट है कि इन शिविरों से बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर बुनियादी सुधार सुगम होता है |


स्कूल के शिक्षकों को छात्रों के साथ शिविर में भाग लेने के लिए कहा जाता है | यह न केवल शिक्षकों को उदाहरण द्वारा नेतृत्व करने में मदद करता है, बल्कि इस रचनात्मक गतिविधि में भागीदार और सहकारी बनने के लिए प्रेरित करता है | सकारात्मक परिणाम बहुत आसानी से आते हैं जब बच्चों को घर पर या स्कूल में ध्यान जारी रखने का अवसर दिया जाता है |


जोहोर, मलेशिया में स्कूल के बच्चे पढाई के पहले ध्यान करते हुए


जब माता-पिता या शिक्षक बच्चों के साथ ध्यान करते हैं तब बहुत उपयोगी होता है | यह एक महत्वपूर्ण पहलू है | बच्चे सिर्फ उपदेश देने से परेशान होते हैं; वे नीतिवचन पसंद नहीं करते हैं, लेकिन जब वे अपने शिक्षक को उसी काम में लगे देखते हैं, जो उन्हें करने के लिए कहा जा रहा है, तो वे आसानी से और उत्सुकता से भाग लेते हैं | आनापान शिविरों की यह गैर-कट्टरपंथी, आसान रचना विशेष रूप से भाती हैं | इसलिए स्कूलों में शिविरों को आयोजित करने के लिए अब और अधिक प्रयास किए जा रहे हैं, जहां बच्चों को ध्यान के अभ्यास को जारी रखने का अवसर मिलेगा | ज्यादातर संस्थाओं में, शालेय समय सारिणी में ध्यान के लिए लगभग १० से १५ मिनट की अवधि प्रदान करके यह किया जाता है |

इंग्लैंड में लड़के


निम्नलिखित कुछ प्रतिनिधिक टिप्पणियां बच्चों से जिन्होंने एक आनापान शिविर किया था:
"इस शिविर के बाद मुझे लगता है कि हर किसी ने यह शिविर करना चाहिए |"
"यह पहली बार चुनौतीपूर्ण और कठिन है लेकिन बाद में मज़ेदार है | खुद के अन्दर देखना अच्छा है |"
"मैंने बहुत फायदा उठाया है, इस शिविर से बहुत सी शांति प्राप्त हुई है |"
"यह मुश्किल है लेकिन आवश्यक है, निश्चित रूप से पढ़ाई में मेरी मदद करेगी |"
"मैं बता नहीं सकता कि यह कितना बढ़िया है | काश मेरी बड़ी बहन भी आ सकती |"
"मुझे पता चला कि मेरा मन एक बंदर की तरह है, हमेशा भटकता रहता है और मैंने सीखा कि इसे कैसे नियंत्रण में लाया जा सकता है |"
"मैंने पिछले साल यह शिविर किया था और इससे मेरी पढ़ाई में बहुत मदद हुई | अब मैं फिर से आया हूँ |"
"मुझे निर्मल, शांतिपूर्ण माहौल पसंद आया और हालांकि ध्यान कभी-कभी मुश्किल होता है, यह बहुत फायदेमंद होता है |"
"मुझे उम्मीद है कि आनापान करके मैं एक बेहतर व्यक्ति बनूंगा |"
"मुझे गुस्सा बहुत आसानी से आता है, लेकिन आनापान के साथ मैं अपने गुस्से को नियंत्रित कर सकता हूँ |"

माता-पिता और शिक्षकों की प्रतिक्रियाएं भी उत्साहवर्धक हैं | एक स्कूल शिक्षक जो सबक की शुरुआत करने से पहले छात्रों के साथ ध्यान करते थे, उनके साथी शिक्षकों ने उनकी कक्षा में असाधारण शांतता का रहस्य पूछा | एक अन्य शिक्षक ने पाया कि छात्रों के साथ उनकी बातचीत अधिक सामंजस्यपूर्ण हो गई थी | एक माँ ने बताया कि शिविर से पहले उसके बेटे और उनके बीच तनाव था; आनापान के बाद वे एक दूसरे को बेहतर ढंग से समझते हैं ; और वे अब पहले से अधिक करीब आ गए हैं |


एक आम गलत धारणा है कि ध्यान कुछ रहस्यमय और सांप्रदायिक प्रक्रिया है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए उपयुक्त नहीं है | यह गलत धारणा बिखर जाती है जब कोई देखता है कि सारे बच्चे शांति और सामंजस्य से, अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले हो कर भी, आनापान का एक साथ अभ्यास कर रहें हैं |

लडके फ़िलेडैल्फ़िया अमेरिका के स्कूल में

हर जगह बच्चे इस अद्भुत तकनीक को सीख सकते हैं - अपने स्वयं के लाभ के लिए, उनके स्कूल के लाभ के लिए और उनके परिवारों और समुदाय के लाभ के लिए |

वापस ऊपर जायें

शिक्षक

Translations

English
Español
Français
한국어
Polski
Português
Pусский

More information

Please visit www.dhamma.org/hi/index